ग्रामीण इलाकों में श्रद्धालुओं के लिए 1 जुलाई से खुलेंगे धार्मिक स्थल



सीमित संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए खुलेंगे धार्मिक स्थल, एसडीएम कराएंगे सोशल डिस्टेंसिंग की पालना, पूर्व में 50 की संख्या में आने वाले धार्मिक स्थल ही खुलेंगे, जिला कलेक्टर्स की रिपोर्ट के बाद सरकार ने लिया था धार्मिक स्थल खोले जाने का फैसला

जयपुर। कोरोना संकट के चलते लागू किए गए लॉकडाउन के दौरान बंद किए गए धार्मिक स्थल कल से खुल जाएंगे। हालांकि ये छूट केवल ग्रामीण इलाकों में ही रहेगी। ग्रामीण इलाकों में उन्हीं धार्मिक स्थलों को खोलने की छूट दी गई है जहां लॉकडाउन से पूर्व भी श्रद्धालु सीमित संख्या में आते थे।

बड़े धार्मिक स्थल जहां श्रद्धालु बड़ी संख्या में आते हैं वो धार्मिक स्थल ग्रामीण इलाकों में बंद रहेंगे। जो धार्मिक स्थल कल से खुलेंगे, उनमें सरकार ने सोशल डिस्टेंसिंग की पालना के आदेश दिए हैं। एसडीएम और अन्य अधिकारियों को सोशल डिस्टेंसिंग की पालना कराने की जिम्मेदारी दी गई है।

सरकार ने ग्रामीण इलाकों में सीमित संख्या वाले धार्मिक स्थलों का खोलने का फैसला जिला कलेक्टर्स की रिपोर्ट के बाद लिया है। जिसमें जिला कलेक्टर्स की ओर से सौंपी गई रिपोर्ट में शहरों में सभी और ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े धार्मिक स्थलों को नहीं खोलने की बात कही गई थी।

50 श्रद्धालुओं वाले धार्मिक स्थल ही खुलेंगे
दरअसल ग्रामीण इलाकों में धार्मिक स्थल खोले जाने की छूट देते हुए सरकार ने उन्हीं धार्मिक स्थलों को खोलने की परमिशन दी है जहां लॉकडाउन से पूर्व सामान्य दिनों में प्रतिदिन 50 या इससे कम लोग आते थे। इन धार्मिक स्थलों पर एक समय में सीमित संख्या में लोग उपासना, दर्शन अथवा अन्य धार्मिक कार्यों के लिए मौजूद रह सकेंगे।

इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग, सैनिटाइजेशन और मास्क पहनने सहित हेल्थ प्रोटोकॉल सहित भारत सरकार की ओर से धार्मिक स्थलों के लिए जारी एसओपी की पालना कराने के निर्देश दिए गए थे।

अधिकारी आज लेंगे तैयारियों का जायजा
वहीं ग्रामीण इलाकों में सीमित श्रद्धालु वाले जिन धार्मिक स्थलों को कल से खोला जाएगा, उसका जायजा लेने के लिए आज एसडीएम और अन्य अधिकारी दौरा करेंगे। साथ धार्मिक स्थल प्रबंधन कमेटियों के साथ बैठक चर्चा करेंगे। मंदिर में प्रवेश से पहले ही श्रद्धालुओं को अपने हाथ सेनेटाइज करने होंगे।

गौरतलब है कि धार्मिक स्थल खोले जाने को लेकर हाल ही में सभी जिला कलेक्टर्स ने सभी धर्मगुरुओं की बैठक ली थी, जिसमें धर्मगुरुओं के सुझावों के बाद कलेक्टर्स ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी।

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