3 माह में 15 लाख पीपीई किट और 8 लाख एन-95 मॉस्क की पड़ेगी जरुरत, क्योंकि रफ्तार में है कोरोना





ऐसी स्थिति में 15 लाख पीपीई किट और करीब 8 लाख एन95 की डिमांड दोनों ही संचालकों द्वारा स्वास्थ्य विभाग को भेजी गई है। विभाग ने छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कॉर्पोरेशन को मांग-पत्र भेज दिया है। इस निर्देश के साथ सप्लाई में कहीं देरी न हो।

रायपुर. प्रदेश में कोरोना के बढ़ते खतरे के में नजर स्वास्थ्य विभाग अभी से आने वाले तीन महीनों की तैयारियों में जुट गया है। चिकित्सा शिक्षा संचालनालय के अधीन मेडिकल कॉलेज और इनके अंतर्गत संचालित कोविड१९ हॉस्पिटल में 12.50 लाख पीपीई किट और 6.30 लाख एन95 मॉस्क की आवश्यकता पड़ेगी। तो वहीं संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं अंतर्गत भी कुछ जिलों में कोविड१९ हॉस्पिटल तैयार हो रहे हैं।

ऐसी स्थिति में 15 लाख पीपीई किट और करीब 8 लाख एन95 की डिमांड दोनों ही संचालकों द्वारा स्वास्थ्य विभाग को भेजी गई है। विभाग ने छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कॉर्पोरेशन को मांग-पत्र भेज दिया है। इस निर्देश के साथ सप्लाई में कहीं देरी न हो।

एक अनुमान के मुताबिक करीब 4500 पीपीई किट रोजाना की खपत है। अब खतरा नॉन-कोविड अस्पतालों में भी बढ़ता जा रहा है। डॉक्टर, नर्स और पैरामेडिकल स्टाफ संक्रमित हो रहे हैं। इन सभी को वायरस के संक्रमण से बचाने के लिए किट और मॉस्क दिए जाएंगे। उधर, कुछ एनजीओ भी सरकार की मदद कर रहे हैं।

जून में नहीं खुल पाएंगी नई टेस्टिंग लैब-

प्रदेश में अभी सिर्फ चार लैब हैं। जिनमें से एक एम्स और बाकी रायपुर, रायगढ़ व जगदलपुर मेडिकल कॉलेज में संचालित है। स्वास्थ्य विभाग बिलासपुर, राजनांदगांव और अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज में लैब खोलने की तैयारी में है। मगर, अब तक यहां इंफ्रास्ट्रक्चर ही खड़ा नहीं हुआ है। सिविल वर्क बचा हुआ है। इसके बाद मशीनों का इंस्टॉलेशन होगा। फिर आईसीएमआर को अनुमति के लिए आवेदन किया जाएगा। टीम आएगी, निरीक्षण करेगी और फिर अनुमति जारी होगी। स्पष्ट है कि जून में एक भी नई लैब नहीं खुल सकती।

स्टैंड बॉय मोड में रहेगा माना कोविड19 हॉस्पिटल-

स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि माना कोविड19 अस्पताल को बंद नहीं किया गया है। हां, नए मरीजों को माना में नहीं आंबेडकर अस्पताल में भर्ती होंगे। जब आंबेडकर अस्पताल के बेड भर जाएंगे, तो माना में मरीजों की भर्ती होगी। आंबेडकर अस्पताल अधीक्षक डॉ. विनीत जैन का कहना है कि व्यवस्था में बदलाव इसलिए किया गया है कि क्योंकि हमारे पास मेडिकल स्टाफ सीमित है।

मरीज एक जगह रहेंगे, तो डॉक्टर व स्टाफ की कम आवश्यकता पड़ेगी।रूटीन की चीजों में भी व्यय कम होगा। मेडिकल स्टाफ के अतिरिक्त अन्य कर्मचारी-अधिकारी यानी मैन पॉवर भी बचेगा। एक इंफ्रास्ट्रकर (माना अस्पताल) पूरी तरह से स्टैंड बॉय मोड में रहेगा। जरुरत के हिसाब से इस्तेमाल किया जाएगा।

एक अनुमान के मुताबिक कोविड अस्पतालों में जिन-जिन संसाधनों की आवश्यकता आने वाले दिनों में पड़ेगी, उन सबकी सूची विभाग के माध्यम से सीजीएमएससी को भेजी जा चुकी है। क्योंकि मरीज बढ़ ही रहे हैं।
-डॉ. निर्मल वर्मा, अतिरिक्त संचालक एवं प्रवक्ता, चिकित्सा शिक्षा संचालनालय

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