चीन के बदले भारत में सामान बनाएंगे ये ब्रांड

गलवान घाटी में चीन की नापाक हरकत के बाद पूरे देश में गुस्सा है और चीनी सामान के बहिष्कार की मांग जोर पकड़ रही है। ब्रांड्स को डर है कि भारतीय उपभोक्ता चीन में बने सामान से दूरी बना सकते हैं। यही वजह है कि उन्होंने भारत में उत्पादन के लिए घरेलू कॉन्ट्रैक्ट मैन्यूफैक्चरर्स से संपर्क साधना शुरू कर दिया है।


देश में चीनी सामान के बहिष्कार की मांग जोर पकड़ रही है

   


हाइलाइट्स:


पूरे देश में चीन के खिलाफ गुस्से का माहौल है और चीनी सामान के बहिष्कार की मांग उठ रही है


चीन में सामान बनाने वाले ब्रांड्स को डर है कि भारतीय उपभोक्ता मेड इन चाइना से कर सकते हैं किनारा


साथ ही सरकार के चीनी सामान पर आयात शुल्क बढ़ाने की भी आशंका है


यही वजह है कि भारत में उत्पादन की संभावनाएं तलाश रहे हैं कई ब्रांड्स

गलवान घाटी में चीन की नापाक हरकत के बाद पूरे देश में गुस्सा है और चीनी सामान के बहिष्कार की मांग जोर पकड़ रही है। चीन में सामान बनाने वाले ब्रांड्स को डर है कि भारतीय उपभोक्ता चीन में बने सामान से दूरी बना सकते हैं। साथ ही सरकार भी चीनी सामान पर आयात शुल्क बढा सकती है।
यही वजह है कि इन कंपनियों ने अब भारत के कॉन्ट्रैक्ट मैन्यूफैक्चरर्स से संपर्क साधना शुरू कर दिया है। इनमें टेलीविजन, एयर कंडीशनर, माइक्रोवेव ओवन, जूते, स्पीकर, ईयरफोन, सेट टॉप बॉक्स और परिधान बनाने वाले ब्रांड शामिल हैं।

डिक्सन, वीडियोटैक्स इंटरनेशनल, एसएसआईपीएल जैसे थर्ड पार्टी मैन्यूफैक्चरर्स का कहना है कि चीन में कोविड-19 संकट शुरू होने के बाद से कंपनियों की सप्लाई बाधित हुई और वे तभी से तैयार माल के आयात पर अपनी निर्भरता कम करने के विकल्प तलाश रही थीं। लेकिन सीमा विवाद और इस मुद्दे पर भारत सरकार के कड़े रुख को देखते हुए पिछले एक सप्ताह में इन कंपनियों ने भारत में अपने ब्रांड के उत्पादन की संभावनाओं पर पूछताछ तेज कर दी है।

चीन में उत्पादन सस्ता
हालांकि कंपनियों का कहना है कि कच्चे माल और कंपोनेंट्स की आपूर्ति में चीन की अब भी बड़ी भूमिका है क्योंकि दूसरे देशों के मुकाबले चीन में यह सस्ता पड़ता है। इंडिया चाइना ट्रेड सेंटर के चेयरमैन वी के मिश्रा ने कहा, 'कंपनियां भारत सरकार के फैसले के मुताबिक काम करेंगी। अगर भारत आयात शुल्क बढ़ाता है तो वे तुरंत इसका विकल्प तलाशेंगी।'

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