चीन से टकराव के बीच बढ़ेगी IAF की ताकत, अंबाला में 27 जुलाई को लैंड होंगे 4 राफेल


पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ तनाव के बीच भारत लगातार अपनी ताकत बढ़ाने के प्रयास में लगा हुआ है. ऐसे में भारत के साझेदार भी उसकी मदद करने में जुटे हुए हैं. फ्रांस ने भी अब फैसला लिया है कि भारत को जल्द से जल्द राफेल विमानों की डिलवरी की जाए. इसी कड़ी में भारतीय वायु सेना को मजबूती देने के लिए जुलाई के आखिर में चार राफेल लड़ाकू विमान भारत आने वाले हैं.

जानकारी के मुताबिक 27 को चार पूरी तरह से लोडेड राफेल विमान अंबाला में उनके होम बेस पर उतरेंगे. राफेल पर 150 किलोमीटर तक की मार करने वाली मिसाइलें लगी हुई हैं. इससे भारतीय वायु सेना की ताकत कहीं ज्यादा बढ़ जाएगी. ये विमान पूरी तरह तैयार हो कर अंबाला आएंगे, जिनमें कुछ बदलाव करने के बाद चंद दिनों के भीतर ये आकाश में उड़ान भी भरने लगेंगे.

जो चीन के पास नहीं वो मिसाइल राफेल में

राफेल विमान में Meteor एयर-टू-एयर मिसाइल्‍स लगी होंगी. इन्‍हें हवाई लड़ाई के लिए दुनिया की बेस्‍ट मिसाइल माना जाता है. बियांड विजुअल रेंज (BVR) वाली यह मिसाइल 120 से 150 किलोमीटर तक मार करती है. इसमें एडवांस्‍ड एक्टिव रडार सीकर लगा है जो इसे किसी भी मौसम में काम करने लायक बनाता है.

Meteor से छोटे ड्रोन्‍स से लेकर क्रूज मिसाइल्‍स, यहां तक कि सुपरफास्‍ट जेट्स तक को निशाना बनाया जा सकता है. टू-वे डेटा लिंक के जरिए बीच में टारगेट बदला जा सकता है. करीब 190 किलो की यह मिसाइल 150 किलोमीटर की रेंज में हमला कर सकती है.

Meteor में 60 किलोमीटर से ज्‍यादा का ‘नो एस्‍केप जोन’ है यानी मिसाइल की स्‍पीड इतनी होगी कि 60 किलोमीटर के दायरे में दुश्‍मन कोई कदम उठाए, उससे पहले ही वो तबाह हो जाएगा. पाकिस्‍तान और चीन के पास इस क्‍लास की कोई मिसाइल नहीं है. राफेल में Meteor के अलावा Scalp मिसाइल भी होगी जिसकी रेंज 300 किलोमीटर से ज्‍यादा है.

भारत ने खरीदे हैं 36 राफेल विमान

मालूम हो कि भारत ने सितंबर 2016 में 59,000 करोड़ रुपये के एक सौदे में फ्रांस से 36 राफेल जेट खरीदे थे, ताकि वायु सेना की लड़ाकू क्षमताओं को बढ़ाया जा सके. रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने पहला राफेल 8 अक्टूबर को हासिल किया था. इन 36 राफेल जेट्स में 30 फाइटर जेट्स हैं और छह ट्रेनर विमान हैं. ट्रेनर जेट्स दो सीटों वाले होंगे. इनमें फाइटर जेट्स के सभी फीचर होंगे.

राफेल जेट के आ जाने के बाद भारतीय वायुसेना की युद्धक क्षमता में काफी बढ़ोत्तरी हो जाएगी. यह विमान कई ताकतवर हथियारों को ले जाने में सक्षम है. साथ ही इसमें मिटियोर एयर टू एयर और स्कैल्प क्रूज मिसाइल भी लगी होंगी.

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