ऑडिट रिपोर्ट से खुलासा, PM की आदर्श ग्राम योजना कसौटी पर नहीं उतरी खरी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से 15 अगस्त 2014 को गांवों के त्वरित विकास के लिए आदर्श ग्राम योजना (Adarsh Gram Yojana) की घोषणा की गई थी। मगर इस बाबत गठित कमेटी ने जब इस योजना का ऑडिट किया तो यह योजना इच्छित उद्देश्य की पूर्ति में विफल साबित हुई।


   


हाइलाइट्स:


पीएम ने 15 अगस्त 2014 को अपने पहले स्वतंत्रता दिवस संबोधन में योजना की घोषणा की थी


योजना के तहत प्रत्येक सांसद को एक गांव को गोद लेकर इसे आदर्श ग्राम के तौर पर विकसित करना था


अधिकांश सांसदों ने अपनी क्षेत्र विकास निधि से योजना के लिए पर्याप्त रकम आबंटित नहीं की


नई दिल्ली
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गांवों के विकास की योजना का कोई प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं पड़ा है और न ही लक्षित उद्देश्य की प्राप्ति हुई है। ग्रामीण विकास विभाग की योजनाओं के प्रदर्शन से संबंधित रिपोर्ट में यह जानकारी देते हुए कहा गया है कि इस योजना की समीक्षा की जानी चाहिए। सांसद आदर्श ग्राम योजना (एसएजीवाई) की घोषणा मोदी ने 15 अगस्त 2014 को प्रधानमंत्री के तौर पर अपने पहले स्वतंत्रता दिवस संबोधन में की थी।

योजना के तहत सांसदों को गोद लेने थे गांव इस योजना के तहत प्रत्येक सांसद को एक गांव को गोद लेकर इसे आदर्श ग्राम के तौर पर विकसित करना था। इस योजना की शुरुआत 11 अक्टूबर 2014 को हुई थी। सूत्रों के मुताबिक 5 चरण के बाद भी मंत्रियों समेत कई सांसदों ने अब तक गांवों को गोद नहीं लिया है। केंद्र ने ग्रामीण विकास मंत्रालय के तहत आने वाली विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के समुचित क्रियान्वयन और उनके प्रभाव के आकलन के लिये एक साझा समीक्षा आयोग (सीआरएम) का गठन किया था।


पर्याप्त फंड नहीं किया गया इस्तेमाल
अपनी रिपोर्ट में सीआरएम ने कहा कि एसएजीवाई के लिये कोई समर्पित कोष नहीं है। किसी और मद की रकम के जरिये इसके लिए कोष जुटाया जाता है। सीआरएम के मुताबिक, उसके दलों ने राज्यों का दौरा किया और उन्हें योजना का कोई महत्वपूर्ण प्रभाव नजर नहीं आया। सीआरएम ने कहा कि इस योजना के तहत सांसदों द्वारा गोद लिये गए गांवों में भी, सांसदों ने अपनी क्षेत्र विकास निधि से इसके लिये पर्याप्त रकम आबंटित नहीं की।

योजना की समीक्षा होनी चाहिए

सीआरएम ने एक रिपोर्ट में कहा, कुछ मामलों में जहां सांसद सक्रिय हैं, कुछ आधारभूत विकास हुआ है, लेकिन योजना का कोई प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं पड़ा है। सीआरएम के मुताबिक, ऐसे में इन गांवों को आदर्श ग्राम नहीं कहा जा सकता और इस योजना की समीक्षा की जानी चाहिए। उसने कहा कि सीआरएम की राय है कि यह योजना अपने मौजूदा स्वरूप में इच्छित उद्देश्यों की पूर्ति नहीं करती। यह अनुशंसा की जाती है कि मंत्रालय इसका प्रभाव बढ़ाने के लिये योजना की समीक्षा कर सकता है।

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