2 महीने में 4.66 लाख करोड़ का घाटा

 कोरोना महामारी के कारण लागू किए गए लॉकडाउन के चलते इंडस्ट्री की हालत खराब है, जिससे सरकार की कमाई पर काफी बुरा असर हुआ है। सरकार की आर्थिक स्थिति का इंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि केवल अप्रैल-मई में राजकोषीय घाटा बढ़कर 4.66 लाख करोड़ रुपये हो गया।


   




कोरोना लॉकडाउन के कारण उद्योग जगत पर काफी बुरा असह हुआ जिससे सरकार की कमाई घटी


चालू वित्त वर्ष के अप्रैल-मई में राजकोषीय घाटा बढ़कर 4.66 लाख करोड़ रुपये हो गया है


अप्रैल और मई महीने में राजकोषीय घाटा बजट अनुमानों का 58.6 फीसदी पर पहुंच गया


इस साल राजकोषीय घाटा 7.96 लाख करोड़ रुपये या जीडीपी का 3.5 प्रतिशत रहने का लक्ष्य तय था


नई दिल्ली
कोरोना संकट (Coronavirus crisis) के कारण सरकार की माली स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है वित्त वर्ष 2020-21 के पहले दो महीने (अप्रैल और मई) में राजकोषीय घाटा (Fiscal deficit)बढ़कर 4.66 लाख करोड़ रुपये या बजट अनुमानों का 58.6 प्रतिशत हो गया। । पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि के दौरान राजकोषीय घाटा बजट अनुमानों का 52 प्रतिशत था। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल और मई के महीने में ने टैक्स कलेक्शन 338.5 अरब रुपया रहा जबकि कुल खर्च 5.12 ट्रिल्यन (5.12 लाख करोड़) रुपया रहा।
टैक्स कलेक्शन काफी कम रहा
कोरोना वायरस महामारी के कारण लागू किए गए लॉकडाउन के कारण टैक्स कलेक्शन कम रहने के कारण राजकोषीय घाटे में बढ़ोतरी हुई। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा फरवरी में पेश किए गए बजट में सरकार ने 2020-21 के लिए राजकोषीय घाटा 7.96 लाख करोड़ रुपये या जीडीपी का 3.5 प्रतिशत रहने का लक्ष्य तय किया था। हालांकि, अब कोरोना वायरस के प्रकोप से पैदा हुए आर्थिक व्यवधानों को देखते हुए इन लक्ष्यों में संशोधित किया जाना है।

2019-20 में फिस्कल डेफिसिट जीडीपी का 4.6 पर्सेंट
CGA (Controller General of Accounts) के आंकड़ों के मुताबिक राजकोषीय घाटा मई के अंत में 4,66,343 करोड़ रुपये था। राजकोषीय घाटा अप्रैल के अंत में बजट अनुमानों का 35.1 प्रतिशत था। राजकोषीय घाटा 2019-20 में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 4.6 प्रतिशत के बराबर हो गया था, जो सात साल में सबसे अधिक है। राजस्व वसूली में कमी के कारण ऐसा हुआ।

यह साल काफी कठिन रहने वाला है

सीजीए के आंकड़ों के अनुसार सरकार की राजस्व प्राप्ति 44,667 करोड़ रुपये या बजट अनुमानों का 2.2 प्रतिशत रही। पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के दौरान राजस्व प्राप्ति बजट अनुमानों का 7.3 प्रतिशत थी। आंकड़ों पर टिप्पणी करते हुए ICRA की वाइस प्रेसिडेंट अदिति नायर ने कहा कि राजस्व प्राप्तियों में भारी गिरावट के बीच कुल खर्चों में मामूली कमी के चलते पहले दो महीनों में राजकोषीय घाटा 4.7 लाख करोड़ रुपये हो गया और ऐसे में यह बहुत कठिनाइयों भरा वित्तीय वर्ष होगा।

इस साल फिस्कल डेफिसिट 6.7 फीसदी तक पहुंचने की संभावना

उन्होंने कहा कि ICRA का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2021 में भारत सरकार का राजकोषीय घाटा बढ़कर 13 लाख करोड़ रुपये या जीडीपी का 6.7 प्रतिशत हो जाएगा, जबकि बजट अनुमानों में इसके आठ लाख करोड़ रुपये या जीडीपी का 3.5 प्रतिशत रहने की बात कही गई थी।

Post a Comment

0 Comments