मई में औद्योगिक उत्पादन पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 34.71% गिरा, लेकिन अप्रैल 2020 के मुकाबले 64.92% बढ़ा

बढ़ा

  • सरकार ने मई में लगातार दूसरे महीने आईआईपी के पूरे आंकड़े जारी नहीं किएसरकार ने मई में लगातार दूसरे महीने आईआईपी के पूरे आंकड़े जारी नहीं किए

  • मई का आईआईपी 88.4 पर था, जो अप्रैल में 53.6 पर था
  • मई 2019 में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक 135.4 पर था

नई दिल्ली. देश का औद्योगिक उत्पादन मई 2020 में पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 34.71 फीसदी घट गया, लेकिन इससे पिछले महीने यानी, अप्रैल 2020 के मुकाबले इसमें 64.92 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। सरकार ने मई में लगातार दूसरे महीने औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) के पूरे आंकड़े जारी नहीं किए।
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा शुक्रवार को जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक मई का आईआईपी 88.4 पर था। अप्रैल में यह 53.6 पर था। इससे पता चलता है कि मई में औद्योगिक गतिविधियों में बढ़ोतरी हुई। मई 2019 में आईआईपी 135.4 पर था।
लॉकडाउन के कारण मई के आंकड़े की तुलना पिछले महीने के साथ नहीं
मंत्रालय ने प्रतिशत में कोई तुलनात्मक आंकड़ा नहीं दिया और कहा कि कोरोनावायरस से संबंधित लॉकडाउन के कारण आईआईपी आंकड़े की तुलना पिछले महीने के साथ नहीं की जा सकती है। कोरोनावायरस महामारी को फैलने से रोकने के लिए पूरे देश में लगाए गए लॉकडाउन के कारण मार्च 2020 के आखिरी सप्ताह के बाद से अधिकतर औद्योगिक प्रतिष्ठान बंद पड़े थे। इसके कारण उत्पादन प्रभावित हुआ। आईआईपी के आंकड़े छह सप्ताह की देरी से आते हैं।
खनन का उप-सूचकांक 87 पर
ताजा आंकड़ों के मुताबिक मई 2020 में खनन का उप सूचकांक 87 पर, मैन्यूफैक्चरिंग का 82.4 पर और बिजली सेक्टर का उप सूचकांक 149.6 पर था। प्राइमरी गुड्स का उप सूचकांक 105.5 पर, कैपिटल गुड्स का 37.1 पर, इंटरमीडिएट गुड्स का 77.6 पर और इंफ्रास्ट्रक्चर/कंस्ट्रक्शन गुड्स का सूचकांक 84.1 पर था। कंज्यूमर डुरेबल्स का सूचकांक 42.2 पर तो कंज्यूमर नॉन डुरेबल का सूचकांक 132.3 पर था।
उद्योग में रफ्तार लाने के लिए और राहत दे सरकार
नाइट फ्रैंक इंडिया की मुख्य अर्थशास्त्री और रिसर्च प्रमुख रजनी सिन्हा ने कहा कि कंज्यूमर नॉन डुरेबल सेगमेंट में स्थिति काफी सुधरी है। अनलॉक के चरण में छुपी हुई मांग के कारण उद्योग में और तेजी आएगी। लेकिन समुचित तेजी के लिए सरकार को और राहत देना होगा। आरबीआई की मुख्य ब्याज दरों में कटौती से उद्योग का उत्पादन और बढ़ सकता है। इसके साथ ही कोरोनावायरस महामारी से निजात मिलने में जितना समय लगेगा, उससे भी आने वाले महीनों में उद्योग की स्थिति तय होगी। एम्के ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज के रिसर्च प्रमुख राहुल गुप्ता ने कहा कि औद्योगिक उत्पादन में गिरावट का जीडीपी पर नकारात्मक असर पड़ेगा।

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