बिहार विधानसभा चुनाव में नया नियम लागू, चुनाव आयोग की चिट्ठी ने उड़ाई नेताओं की नींद





बिहार विधानसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग ने सूबे के सभी राजनीतिक दलों को चिट्ठी लिखी है। जिसके बाद राजनीतिक दलों की परेशानी बढ़ गई है। साथ ही दागी नेताओं की नींद उड़ गई है. क्योंकि, अब उनके माननीय बनने के सपने में ग्रहण लग सकता है ।

चुनाव आयोग की चिट्ठी में क्या है
चुनाव आयोग ने बिहार के सभी राजनीतिक दलों को चिट्ठी लिखी है। जिसमें बिहार विधानसभा चुनाव में सभी राजनीतिक दलों को ये बताना होगा कि उसने दागी को क्यों प्रत्याशी चुना.. यानि वैसे व्यक्ति जिसके खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं उन्हें प्रत्याशी क्यों चुना. साथ ही राजनीतिक दलों को इसके बारे में सूचना भी प्रकाशित करवानी होगी


सुप्रीम कोर्ट ने दिया था आदेश
दरअसल, चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मद्देनजर सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को ये चिट्ठी लिखी है। साथ ही ये व्यवस्था पहली बार बिहार विधानसभा चुनाव में लागू होगा। इसके तहत कोई भी दल अगर किसी ऐसे व्यक्ति को अभ्यर्थी चुनता है जिसके खिलाफ आपराधिक मामला लंबित है तो उसको यह बताना होगा कि उसे उसने कैंडिडेट क्यों चुना ? साथ ही 48 घंटे के भीतर फॉर्मेट सी 7 में उसे समाचार पत्रों में सूचना देनी होगी। यह सूचना राज्य और राष्ट्रीय अखबार में देनी होगी। साथ ही सूचना प्रकाशित करने के 72 घंटे के अंदर आयोग को फॉर्मेट सी 8 में बताना होगा। इसमें प्रावधान है कि अगर कोई दल इस आदेश का पालन नहीं करता है तो उसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में कंटेम्प्ट प्रोसीडिंग चलाई जाएगी।

दागियों की उड़ी नींद
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद राजनीतिक पार्टियों के सामने मुश्किलें बढ़ गई है। बिहार में शायद ऐसे विधायक हैं जिनके खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं है . क्योंकि बिहार में लोगों की मान्यता है कि नेता बनने के लिए पहली जरूरी योग्यता अपराधी होना है. ऐसे में उन दागियों की नींद उड़ी है. साथ ही राजनीतिक दलों को भी उम्मीदवार के चयन में पसीने छूट रहे हैं.

युवाओं और समाजसेवियों में नई आस
सुप्रीम कोर्ट के आदेश और चुनाव आयोग द्वारा अधिसूचना जारी करने के बाद समाजसेवियों और युवाओं में नई उम्मीद जगी है कि अब उन्हें मौका मिल सकता है । क्योंकि इस बार राजनीतिक दल वैसे उम्मीदवार की तलाश करेंगे वो बेदाग होंगे 

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