जिंदगियां बचाने की चिकित्सकों की जिद, मजबूत हौसलों से कोरोना को हराया



-तीन माह से जिंदगियां बचाने में जुटे हैं चिकित्सक

पाली। Doctors Day Special : विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 [ COVID-19 Virus ] से पूरी दुनिया भयभीत है। पिछले तीन माह में हर कोई अपनी जान बचाने की फिक्र में डूबा रहा। लेकिन, संकट के इस दौर में भी चिकित्सकों ने जान की परवाह किए बिना हजारों जिंदगियों के लिए खुद को झोंक दिया। यहां तक कि घर-परिवार, रिश्ते-नाते और सामाजिक दायित्व [ Social Obligation ] को भी तिलांजलि देकर रात-दिन कोरोना को हराने में डटे रहे। चिकित्सक ही ऐसा वर्ग है, जिसने कोरोना का सीधा सामना किया। उन्होंने अपने मजबूत हौंसलों से न केवल सैकड़ों मरीजों को दुरुस्त किया, बल्कि खुद को भी महफूज रखा। ऐसे ही कोरोना योद्धाओं [ Corona Warriors ] से पत्रिका ने बातचीत की...पेश है अंश।

सकारात्मक ऊर्जा से स्वस्थ किए सैकड़ों मरीज
मेडिकल कॉलेज के सहायक आचार्य डॉ. प्रभुदयाल। जिले के सबसे बड़े कोविड केयर सेंटर के प्रभारी। अग्रसेन भवन स्थित केयर सेंटर में करीब सवा तीन सौ मरीज दाखिल हुए। अधिकांश स्वस्थ होकर घर लौट गए। मरीजों के भीतर से कोरोना का भय दूर करना बड़ी चुनौती रही। बकौल डॉ. प्रभुदयाल, कोरोना संक्रमण के दौरान मेरी ड्यूटी आइसीयू और कोविड केयर सेंटर में रही। इस महामारी से पूरी दुनिया भयभीत थी। तब कुछ असहज होना तो लाजिमी है, लेकिन मरीज के प्रति जिम्मेदारी के अहसास ने हौसला कभी कमजोर नहीं होने दिया। जब हमारा हौसला मजबूत रहा तो मरीज भी प्रेरित हुए। कोविड केयर सेंटर में पॉजिटिव मरीजों को नियमित रूप से योग, प्राणायाम कराया। इसका प्रभाव यह हुआ कि अधिकांश मरीज ठीक होकर घर चले गए।

वॉर रूम से संभाला मोर्चा
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के वॉर रूम के प्रभारी के तौर पर डॉ. अंकित माथुर ने बेहतर प्रबंधन किया। उन्होंने वार रूम से कोरोना मरीजों का रिकॉर्ड, सर्वे, सेंपल सर्वे, कोरोना संक्रमण से जान गंवाने वाले मरीजों के शव का नियमानुसार अंतिम संस्कार करवाना आदि महत्वपूर्ण जिम्मा संभाला। जिले में कहां-कहां सर्वे कराना है, कितनी टीमें काम करेंगी, टीम का प्रतिनिधित्व कौन करेगा आदि प्रबंधन भी संभाल रहे हैं। उन्होंने कोविड-19 का नियमित बुलेटिन भी शुरू किया, जिसमें जिले की स्थिति को ग्राफिक्स रूप से बेहतर ढंग से दर्शाया। कोविड केयर सेंटर पर होने वाले तमाम प्रबंधों की मॉनिटरिंग भी डॉ. माथुर कर रहे हैं। घर-परिवार की चिंता छोडकऱ उन्होंने जिम्मेदारी को महत्व दिया। होली से पूर्व वे अपने माता-पिता से मिले हैं। वे तीन माह तक जोधपुर में पत्नी और बच्चों को भी नहीं संभालने जा पाए।

मंडिया रोड पर किया डोर टू डोर सर्वे
पाली शहर में कोरोना संक्रमण का व्यापक असर जंगीवाड़ा और मंडिया रोड पर ही मिला। यहां बड़ी संख्या में कोरोना संक्रमित सामने आए। बांगड़ अस्पताल के दंत चिकित्सक डॉ. अनिरुद्ध शर्मा की अगुवाई में टीम को मंडिया रोड इलाके में तैनात किया गया। टीम ने घर-घर सर्वे किया। करीब एक माह तक डॉ. शर्मा कोरोना संक्रमितों की पहचान के लिए घर-घर घूमते रहे। यही नहीं, उन्होंने अस्पताल में भर्ती मरीजों के किचन का प्रबंधन भी सफल ढंग से संचालित किया। कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए नियमित रूप से चाय, नाश्ता, भोजन इत्यादि उपलब्ध कराया। उन्होंने खुद के जान की परवाह किए बिना दंत चिकित्सक के रूप में ओपीडी में भी सेवाएं दी।

मोटिवेशनल क्लास में मरीजों को किया भयमुक्त
बांगड़ अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. सुरेन्द्रसिंह नेगी। आइसीयू, ओपीडी और केयर सेंटर पर मोर्चा संभाला। अग्रसेन भवन में केयर सेंटर पर भर्ती मरीजों की मोटिवेशनल क्लास लेते हैं। उन्होंने मरीजों के भीतर से कोरोना का भय खत्म करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। डॉ. नेगी बताते हैं, कोरोना के भय को उन्होंने बहुत नजदीक से देखा। यहां आने वाला हर मरीज अत्यधिक भयभीत होता है। मरीजों को यह कहकर भयमुक्त किया कि कोरोना उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकता। सकारात्मकता से कोरोना संक्रमितों का आत्मबल मजबूत किया। उनके सकारात्मक रुख से मरीज भयमुक्त हुए। यह सिलसिला अब तक चला आ रहा है। खुद को भी महफूज रखना चुनौती रहा। तीन माह तक परिवार से दूरियां रखी। ईश्वर का शुक्रगुजार है कि अधिकांश मरीज दुरुस्त हो गए।

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