दिल्ली में अब सुधार दिख रहा है, उम्मीद है चीजें बेहतर होंगी-मनीष सिसोदिया

आखिर अभी दिल्ली में कोरोना की क्या स्थिति है, सरकार को एक्सपर्टस से क्या फीडबैक मिल रहा है? दिल्ली की अर्थव्यवस्था कितनी प्रभावित हुई है? क्या इस वजह से आने वाले दिनों में बिजली, पानी पर दिल्ली सरकार सब्सिडी समाप्त कर देगी?


मनीष सिसोदिया

   




सिसोदिया ने कहा, कोई ढिलाई नहीं और तैयारियों में कोई कमी नहीं होगी


टेस्टिंग, बेड की संख्या बढ़ाने, प्जाज्मा थेरेपी, सर्विलांस व होम आइसोलेशन पर जोर


एजुकेशन के लिए इस साल जीरो ईयर को लेकर फैसला एक राष्ट्रीय निर्णय होगा


सरकार के सामने बड़ी चुनौती, केंद्र से 5000 करोड़ रु की आर्थिक मदद मांगी है


दिल्ली में सब्सिडी जारी रहेगी, हमने जो वादे किए हैं, उन्हें पूरा किया जाएगा


दिल्ली में कोरोना संक्रमण (Corona cases in Delhi) के मामलों में देश में टॉप तीन राज्यों में शामिल दिल्ली में केसों का आना जारी है। हालांकि बीते कुछ दिनों से रिकवर करने वालों का आंकड़ा भी तेजी से बढ़ा है। किसी भी स्थिति से निपटने के लिए अस्पतालों, होटलों, बैंक्वेट हॉल और अन्य स्थानों पर अतिरिक्त बेड का इंतजाम किया जा रहा है। आखिर अभी दिल्ली में कोरोना की क्या स्थिति है (Covid situation in Delhi), सरकार को एक्सपर्टस से क्या फीडबैक मिल रहा है? दिल्ली की अर्थव्यवस्था कितनी प्रभावित हुई है? क्या इस वजह से आने वाले दिनों में बिजली, पानी पर दिल्ली सरकार सब्सिडी समाप्त कर देगी? एजुकेशन के लिए इस साल को जीरो वर्ष भी घोषित किया जा सकता है? इन सभी मुद्दों पर उपमुख्यमंत्री और इस समय वित्त, हेल्थ जैसे महत्वपूर्ण विभागों का प्रभार संभाल रहे मनीष सिसोदिया (Deputy CM Mahish Sisodia) से बातचीत की गुलशन राय खत्री और भूपेन्द्र शर्मा ने:

पिछले दो हफ्ते में सुधार की उम्मीद तो नजर आई है लेकिन कोरोना मरीजों की संख्या को देखें तो दिल्ली अभी भी टॉप थ्री में है। जून खत्म हो गया है। अब दिल्ली में कोरोना की क्या स्थिति है?पूरे देश में दिल्ली में सबसे ज्यादा टेस्ट हो रहे हैं। अधिक टेस्ट होने से मरीजों की संख्या भी बढ़ी है लेकिन इसमें घबराने की बात नहीं है। जब तक टेस्ट नहीं होंगे तो कोरोना संक्रमण परकंट्रोल करना ही मुश्किल होता। आज दिल्ली में 20 हजार से ज्यादा टेस्ट हो रही है। दिल्ली में कोरोना मरीजों की संख्या ज्यादा होने का एक कारण यह भी है कि यहां पर विदेशों ने आने वाले लोगों की संख्या बहुत अधिक रही। दिल्ली ने एक बड़ी जिम्मेदारी निभाई। जब कोरोना शुरू हुआ तो दिल्ली और मुंबई में इंटरनैशनल फ्लाइट बहुत आई। इनमें से 35 हजार लोग दिल्ली में रहे और बड़ी संख्या में लोग दिल्ली में आकर दूसरे राज्यों में गए। पिछले कुछ दिनों के आंकड़ें देखें तो अभी कहा जा सकता है कि दिल्ली में स्थिति धीरे- धीरे स्टेबल हो रही है। जून के पहले दो हफ्तों में स्थिति गंभीर थी।हालांकि अभी भी पुख्ता तौर पर कुछ कहना जल्दबाजी होगा कहना लेकिन फिर भी दिल्ली में स्टेबिलिटी (स्थिरता) दिख रही है।

हमारे मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बहुत मेहनत की है। केंद्र से लेकर विभिन्न संस्थाओं, डॉक्टर व कोरोना लड़ाई में शामिल सभी के साथ बेहतर समन्वय रखा है। जरूरत पड़ने पर उन्होंने हाथ भी जोड़े हैं। हमें क्रेडिट नहीं चाहिए। कोरोना की लड़ाई कोई भी अकेले नहीं जीत सकता, सब मिलकर ही इस लड़ाई को जीत सकते हैं। उम्मीद है कि जो सुधार नजर आ रहा है, वो जारी रहेगा और स्थितियां बेहतर होती जाएंगी। लेकिन सरकार किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरत सकती और तैयारियों में कोई कमी नहीं होगी। जैसे पहले तैयारियां की जा रही थी, उसी फॉर्मूले के आधार पर आने वाले महीने में भी कोरोना से लड़ाई जारी रहेगी।

जून की शुरुआत में लोग बेड की कमी के कारण एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भागते नजर आए, अब क्या तैयारी है? क्या दिल्ली वाले ये मानें कि आने वाले दिनों में बेड की कमी नहीं होगी और अगर किसी को जरूरत पड़ती है तो उसे अस्पताल में इलाज मिलने में दिक्कत नहीं होगी?
दिल्ली वाले आश्वस्त रहें। अब पर्याप्त से ज्यादा इंतजाम है। मुख्यमंत्री ने कोरोना से लड़ाई में पांच हथियारों का मुख्य तौर पर जिक्र किया है। उसी फॉर्मूले पर दिल्ली सरकार डटकर कोरोना से लड़ाई लड़ रही है और पूरी उम्मीद है कि दिल्ली जरूर जीतेगी। दिल्ली सरकार पांच चीजें लेकर चली है। सबसे पहले खूब टेस्टिंग, पूरे देश में सबसे ज्यादा टेस्टिंग। टेस्टिंग से बिल्कुल भी नहीं डरना है। न सरकार डर रही है और न ही लोगों को डरना है। ज्यादा नंबर आने से कोई डर नहीं होना चाहिए। सरकार ने टेस्टिंग में कोई कंजूसी नहीं की है। ज्यादा टेस्ट होंगे, तभी तो बीमारी को ठीक किया जा सकेगा। लोगों ने भी खूब टेस्ट करवाए हैं। जून के फर्स्ट वीक में कोरोना केस तेजी से बढ़ रहे थे और रिकवरी रेट भी कम था। बेड को लेकर भी कुछ समस्या थी और उसी हिसाब सेसरकार ने अपनी तैयारी की थी।

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